# विदेशी लिस्टिंग नियम संशोधन 2026: GIFT IFSC में परिवर्तनीय डिबेंचर और अधिमानी शेयर भी सूचीबद्ध होंगे

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**एक पंक्ति में:** 3 नवंबर 2026 को कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) ने भारतीय कंपनियों को GIFT IFSC में केवल इक्विटी शेयर ही नहीं, बल्कि परिवर्तनीय डिबेंचर और अधिमानी शेयर भी सूचीबद्ध करने की अनुमति दी, और ऋणात्मक निवल मूल्य वाली कंपनियों के लिए पात्रता की शर्तें आसान कीं।

## मुख्य तथ्य
- **अधिसूचना जारी की:** कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, 3 नवंबर 2026 (G.S.R. 968(E))
- **इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स:** इक्विटी शेयर, परिवर्तनीय डिबेंचर, अधिमानी शेयर
- **ऋणात्मक निवल मूल्य वाली कंपनियाँ:** पात्र, यदि शुद्ध निर्गम का कम से कम 75% QIB को मिले
- **बकाया चूक की भरपाई के बाद प्रतीक्षा:** 2 वर्ष से घटाकर छह महीने से अधिक
- **अनुमत एक्सचेंज:** India INX और NSE IX, GIFT IFSC
- **नियामक:** IFSCA (IFSCA अधिनियम, 2019)
- **आधार कानून:** धारा 23(3), कंपनी अधिनियम, 2013

## घटनाक्रम
- 2020: कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा धारा 23(3) जोड़ी गई, जिससे अनुमत विदेशी क्षेत्राधिकारों में लिस्टिंग का रास्ता खुला
- 24 जनवरी 2024: MCA ने Companies (Listing of equity shares in permissible jurisdictions) Rules, 2024 अधिसूचित किए (G.S.R. 61(E))
- 3 जुलाई 2025: G.S.R. 443(E) द्वारा नियमों में संशोधन
- 3 नवंबर 2026: Amendment Rules, 2026 अधिसूचित: इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स और आसान पात्रता (G.S.R. 968(E))

## क्या हुआ

**3 नवंबर 2026** को **कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA)** ने **Companies (Listing of equity instruments in permissible jurisdictions) Amendment Rules, 2026** अधिसूचित किए (अधिसूचना **G.S.R. 968(E)**)। यह संशोधन 2024 के उन नियमों को बदलता है जिनके तहत भारतीय सार्वजनिक कंपनियाँ देश के बाहर के स्टॉक एक्सचेंजों पर सीधे सूचीबद्ध हो सकती हैं। अभी इसका अर्थ है गुजरात के **GIFT IFSC** में स्थित दो अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज।

सबसे बड़ा बदलाव: अब कंपनियाँ केवल इक्विटी शेयर ही नहीं, बल्कि **इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स** सूचीबद्ध कर सकेंगी। इनकी परिभाषा है: किसी भारतीय कंपनी द्वारा जारी **इक्विटी शेयर, परिवर्तनीय डिबेंचर और अधिमानी शेयर**। नियमों में पात्रता की कुछ शर्तें भी ढीली की गई हैं, जिनमें **ऋणात्मक निवल मूल्य** (negative net worth) वाली कंपनियों से जुड़ी शर्त भी है। ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से लागू हो गए हैं।

## पृष्ठभूमि

- **कानूनी आधार:** **कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2020** द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 में धारा 23(3) जोड़ी गई। यह धारा निर्धारित श्रेणी की सार्वजनिक कंपनियों को अनुमत विदेशी क्षेत्राधिकारों के अनुमत एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध करने के लिए निर्धारित प्रतिभूतियाँ जारी करने की अनुमति देती है।
- **जनवरी 2024 का ढाँचा:** MCA ने **24 जनवरी 2024** को **G.S.R. 61(E)** द्वारा Companies (Listing of equity shares in permissible jurisdictions) Rules, 2024 अधिसूचित किए थे। मौजूदा बदलाव से पहले इनमें अंतिम संशोधन 3 जुलाई 2025 को G.S.R. 443(E) द्वारा हुआ था।
- **FEMA पक्ष:** **डायरेक्ट लिस्टिंग योजना** (Direct Listing Scheme) **Foreign Exchange Management (Non-debt Instruments) Rules, 2019 की अनुसूची XI** में है। सरकार के जनवरी 2024 के FAQ के अनुसार ऐसे शेयरों में केवल अनिवासी ("permissible holders") ही निवेश या व्यापार कर सकते हैं; भारतीय निवासी और भारतीय म्यूचुअल फंड नहीं।
- **एक्सचेंज और नियामक:** अनुमत अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज हैं **India International Exchange (India INX)** और **NSE International Exchange (NSE IX)**। दोनों GIFT IFSC में हैं और **अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA)** द्वारा विनियमित हैं।

## मुख्य बिंदु

| प्रावधान | पहले (2024 के नियम) | 2026 के संशोधन के बाद |
|---|---|---|
| क्या सूचीबद्ध हो सकता है | इक्विटी शेयर | इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स: इक्विटी शेयर, परिवर्तनीय डिबेंचर, अधिमानी शेयर |
| नियमों का नाम | ...Listing of equity shares... | पूरे नियमों में "shares" की जगह "instruments" |
| ऋणात्मक निवल मूल्य (नियम 5(d)) | अपात्र | पात्र, यदि जारीकर्ता **शुद्ध निर्गम का कम से कम 75% अर्हित संस्थागत क्रेताओं (QIB)** को आवंटित करे |
| बैंक, सार्वजनिक वित्तीय संस्थान, गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर धारक या अन्य सुरक्षित लेनदार के बकाया भुगतान में पुरानी चूक (नियम 5(e)) | चूक की भरपाई के बाद **दो वर्ष** बीतने पर ही पात्र | यह अवधि घटाकर **छह महीने से अधिक** |
| वार्षिक रिटर्न / वित्तीय विवरण दाखिल करने में चूक (नियम 5(g)) | अपात्र | अपात्र केवल तब, जब चूक की **भरपाई न की गई हो** |
| मौजूदा निवेशक (नियम 4) | "existing shareholders" | "existing holders" |
| IFSC की गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियाँ (नियम 3) | खंड (a) में सभी गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों के साथ शामिल | खंड (a) से बाहर; नए खंड (c) में उस सीमा तक शामिल, जहाँ तक वे IFSCA अधिनियम, 2019 और उसके विनियमों का पालन करती हैं |
| प्रॉस्पेक्टस दाखिल करना | Form LEAP-1 | संशोधित Form LEAP-1, जिसमें कंपनी अधिनियम के तहत लंबित किसी भी निरीक्षण, अन्वेषण या जाँच की जानकारी देनी होगी |

ये नियम कंपनी अधिनियम, 2013 की **धारा 23(3) सपठित धारा 469** के तहत बनाए गए हैं। QIB को आवंटन अनुमत क्षेत्राधिकार के प्रतिभूति बाज़ार नियामक के विनियमों के अनुसार करना होगा।

## यह क्यों महत्वपूर्ण है

- **पूँजी जुटाने के अधिक साधन:** कंपनियाँ अब GIFT IFSC में विदेशी निवेशकों को सामान्य इक्विटी के अलावा परिवर्तनीय डिबेंचर और अधिमानी शेयर जैसे मिश्रित साधन भी दे सकेंगी।
- **ऋणात्मक निवल मूल्य वाली कंपनियाँ:** इस छूट से उन कंपनियों के लिए रास्ता खुलता है जिनकी देनदारियाँ परिसंपत्तियों से अधिक हैं, बशर्ते निर्गम का बड़ा हिस्सा संस्थागत क्रेताओं को जाए। BTG Advaya के अमित बैद के अनुसार इससे तेज़ी से बढ़ते स्टार्ट-अप और भारी पूँजी वाले वे व्यवसाय आकर्षित हो सकते हैं जिन्हें मुनाफ़े में आने से पहले बड़ी पूँजी चाहिए। Nangia Global की अंजलि मल्होत्रा ने PTI से कहा कि QIB की शर्त आम निवेशकों की रक्षा करती है।
- **शुरुआती निवेशकों के लिए निकास:** Price Waterhouse & Co LLP के सुरेश स्वामी ने PTI से कहा कि "shareholders" की जगह "holders" शब्द आने से अधिमानी साधन रखने वाले प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फंडों को निकास का रास्ता मिल सकता है।
- **नियमों में तालमेल:** मल्होत्रा के अनुसार ये बदलाव MCA के नियमों को IFSCA के मौजूदा लिस्टिंग विनियमों के अनुरूप लाते हैं।
- **GIFT IFSC की भूमिका:** सरकार के 2024 के FAQ में IFSC का उद्देश्य "onshoring the offshore" बताया गया है, यानी भारत से जुड़े वित्तीय कारोबार को विदेश से वापस देश में लाना।

## मुद्दे और आलोचना

- **दूसरे कानूनों को भी बदलना होगा:** BTG Advaya के अमित बैद ने PTI से कहा कि "नियामकीय दरवाज़ा खुल गया है", लेकिन वास्तविक पूँजी प्रवाह इस पर निर्भर करेगा कि **FEMA** और **कर** ढाँचा कितनी जल्दी बदलता है; निवेशक निकास और कराधान पर स्पष्टता चाहते हैं।
- **निवेशक सुरक्षा:** ऋणात्मक निवल मूल्य की रोक हटाने से खरीदारों का जोखिम बढ़ता है। नियम इसका उत्तर यह देते हैं कि ऐसे निर्गम मुख्य रूप से QIB तक सीमित रहें।
- **खरीदारों का सीमित दायरा:** FEMA योजना के तहत भारतीय निवासी ये प्रतिभूतियाँ नहीं खरीद सकते, इसलिए माँग GIFT IFSC के विदेशी निवेशकों पर ही निर्भर है।
- **असर अभी देखना बाकी:** 2024 से अब तक कितनी कंपनियों ने डायरेक्ट लिस्टिंग का उपयोग किया, यह अधिसूचना में नहीं बताया गया है; इसलिए असर वास्तविक निर्गमों से ही पता चलेगा।

## आगे की राह

- FEMA की डायरेक्ट लिस्टिंग योजना और कर नियमों में भी उसी अनुरूप बदलाव, ताकि परिवर्तनीय डिबेंचर और अधिमानी शेयरों के साथ स्पष्ट व्यवहार हो।
- घाटे वाले जारीकर्ताओं के लिए प्रकटीकरण पर IFSCA और एक्सचेंजों के स्पष्ट नियम।
- सूचीबद्ध कंपनियों और निवेशकों को रूपांतरण, निकास और रिपोर्टिंग पर जल्दी मार्गदर्शन।

## प्रारंभिक परीक्षा के लिए तथ्य

- **कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय** ने 3 नवंबर 2026 को G.S.R. 968(E) के रूप में अधिसूचित किया।
- मूल कानून: कंपनी अधिनियम, 2013 की **धारा 23(3)**, जिसे कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2020 ने जोड़ा।
- "इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स" = **इक्विटी शेयर, परिवर्तनीय डिबेंचर, अधिमानी शेयर**।
- ऋणात्मक निवल मूल्य वाली कंपनियाँ पात्र, यदि शुद्ध निर्गम का **कम से कम 75%** QIB को जाए।
- बैंक या सुरक्षित लेनदारों के बकाया में चूक की भरपाई के बाद की प्रतीक्षा अवधि दो वर्ष से घटाकर **छह महीने से अधिक**।
- रजिस्ट्रार के पास प्रॉस्पेक्टस **Form LEAP-1** में दाखिल होता है।
- अनुमत अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज: **India INX** और **NSE IX**, दोनों GIFT IFSC में, नियामक **IFSCA** (IFSCA अधिनियम, 2019 के तहत गठित)।
- FEMA आधार: Foreign Exchange Management (Non-debt Instruments) Rules, 2019 की **अनुसूची XI**।

## SSC, बैंकिंग और रेलवे के लिए वन-लाइनर

- कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने **नवंबर 2026** में विदेशी लिस्टिंग नियमों में संशोधन किया।
- भारतीय कंपनियाँ अब GIFT IFSC में **परिवर्तनीय डिबेंचर और अधिमानी शेयर** भी सूचीबद्ध कर सकती हैं।
- **GIFT IFSC** **गुजरात** में है।
- **IFSCA** अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों में वित्तीय सेवाओं का एकीकृत नियामक है।
- QIB का पूरा नाम **qualified institutional buyer** (अर्हित संस्थागत क्रेता) है।

अर्थव्यवस्था के और अपडेट [साप्ताहिक करंट अफेयर्स क्विज़](/hi/current-affairs) में दोहराएँ, और परीक्षा की तैयारी के लिए [SSC CGL](/hi/ssc-cgl) पेज देखें।

## मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

**"भारत के प्रत्यक्ष विदेशी लिस्टिंग नियमों में 2026 का संशोधन उन साधनों और कंपनियों का दायरा बढ़ाता है जो GIFT IFSC में सूचीबद्ध हो सकती हैं। इसकी संभावनाओं और आवश्यक सुरक्षा उपायों की चर्चा कीजिए।"** (GS III, 250 शब्द)

उत्तर में शामिल करें:
1. ढाँचा: कंपनी अधिनियम की धारा 23(3), MCA के 2024 के नियम, FEMA की अनुसूची XI, नियामक के रूप में IFSCA।
2. बदलाव: इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स, 75% QIB शर्त के साथ ऋणात्मक निवल मूल्य वाली कंपनियाँ, चूक के बाद कम प्रतीक्षा अवधि, IFSC में स्थित कंपनियाँ।
3. लाभ: स्टार्ट-अप और अधिक पूँजी वाली कंपनियों के लिए धन, निवेशकों का निकास, "onshoring the offshore"।
4. चिंताएँ और सुरक्षा उपाय: FEMA और कर नियमों में तालमेल, निवेशक सुरक्षा, प्रकटीकरण के मानदंड।

## परीक्षा के लिए
- **UPSC:** GS III: पूँजी बाज़ार, विदेशी पूँजी जुटाना, GIFT IFSC और विदेशी निवेश; प्रारंभिक परीक्षा: IFSCA, धारा 23(3), इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स
- **Banking:** वित्तीय जागरूकता: GIFT IFSC के एक्सचेंज, IFSCA, QIB, परिवर्तनीय डिबेंचर और अधिमानी शेयर
- **SSC:** करंट अफेयर्स: नियम अधिसूचित करने वाला मंत्रालय, GIFT IFSC का स्थान, अब अनुमत इंस्ट्रूमेंट्स

## मुख्य शब्द
- **परिवर्तनीय डिबेंचर (Convertible debenture):** ऋण-पत्र जिसे जारी करने वाली कंपनी के इक्विटी शेयरों में बदला जा सकता है
- **अर्हित संस्थागत क्रेता (QIB):** प्रतिभूति बाज़ार नियामक द्वारा मान्य बड़ा संस्थागत निवेशक, जैसे कोई फंड या बैंक
- **ऋणात्मक निवल मूल्य (Negative net worth):** वह स्थिति जब कंपनी की देनदारियाँ उसकी परिसंपत्तियों से अधिक हो जाएँ और शेयरधारकों की पूँजी समाप्त हो जाए
- **IFSC:** अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र, जो SEZ अधिनियम, 2005 के तहत स्थापित होता है और IFSCA अधिनियम, 2019 के तहत विनियमित होता है; GIFT IFSC भारत का पहला IFSC है

## स्रोत
- [Gazette of India, MCA notification G.S.R. 968(E): Companies (Listing of equity instruments in permissible jurisdictions) Amendment Rules, 2026 (copy hosted by TaxGuru)](https://taxguru.in/wp-content/uploads/2026/11/mca-expands-ifsc-listing-rules-to-equity-instruments-in-2026.pdf)
- [PIB, FAQs on Direct Listing Scheme, January 2024](https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2024/jan/doc2024124300801.pdf)
- [CAclubindia, MCA notifies Overseas Listing Amendment Rules 2026 (G.S.R. 968(E), 3 Nov 2026)](https://www.caclubindia.com/news/mca-notifies-overseas-listing-amendment-rules-2026-26937.asp)
- [Kashmir Observer (PTI), Govt amends direct overseas listing norms for Indian cos, 6 Nov 2026](https://kashmirobserver.net/2026/11/06/govt-amends-direct-overseas-listing-norms-for-indian-cos/)
- [Millennium Post (PTI), Govt eases overseas listing norms for Indian companies, 6 Nov 2026](https://www.millenniumpost.in/business/govt-eases-overseas-listing-norms-for-indian-companies-682408)
- [UNI India, overseas listing amendment rules, 5 Nov 2026](https://www.uniindia.com/business-economy/business-stock-exchanges-overseas-listing/236293)
- [CA2013, Rule 3 of the Listing in permissible jurisdictions Rules, 2024 (as amended)](https://ca2013.com/rule/3-companies-listing-equity-shares-permissible-jurisdictions-rules-2024/)

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