UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2027: परीक्षा योजना, अंक-कटौती और कथन-आधारित प्रश्नों के प्रारूप

आधिकारिक नोटिस के अनुसार UPSC प्रारंभिक परीक्षा की योजना: दोनों प्रश्न-पत्र, अंक, समय, एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन, CSAT का 33% नियम और कथन-आधारित प्रश्न।

अपडेट 1 नवंबर 2026· 7 मिनट· RankVyuh संपादकीय · आधिकारिक सूचनाओं से जाँचा गयाRead in English

संक्षिप्त उत्तर

UPSC प्रारंभिक परीक्षा में दो अनिवार्य वस्तुनिष्ठ प्रश्न-पत्र होते हैं, सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र I और प्रश्न-पत्र II (CSAT), दोनों 200 अंक और दो घंटे के। मुख्य परीक्षा के लिए चयन प्रश्न-पत्र I के अंकों से होता है; CSAT केवल अर्हक है, जिसमें 33% (66 अंक) ज़रूरी हैं। गलत उत्तर पर प्रश्न के एक-तिहाई अंक कटते हैं। प्रारंभिक परीक्षा के अंक अंतिम योग्यता-क्रम में नहीं गिने जाते।

UPSC सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा एक छँटनी परीक्षा (स्क्रीनिंग टेस्ट) है, जिसमें एक ही दिन दो वस्तुनिष्ठ प्रश्न-पत्र होते हैं। यह लेख UPSC के परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-CSE (दिनांक 4 फ़रवरी 2026) में दी गई योजना पर आधारित है। UPSC ने अपना वार्षिक कैलेंडर 2027, 20 मई 2026 को अपलोड किया था; 2027 की तारीख़ों के लिए हमारा UPSC प्रारंभिक परीक्षा तिथि पेज देखें। 2027 की परीक्षा का नोटिस आने पर उसकी योजना upsc.gov.in पर ज़रूर जाँच लें, ताकि कोई बदलाव छूट न जाए।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा की योजना एक नज़र में

प्रश्न-पत्रप्रकारअंकसमयहर गलत उत्तर पर कटौतीभूमिका
सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र Iवस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय)2002 घंटेप्रश्न के अंकों का एक-तिहाईतय करता है कि मुख्य परीक्षा के लिए कौन चुना जाएगा
सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र II (CSAT)वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय)2002 घंटेप्रश्न के अंकों का एक-तिहाईअर्हक: 33% (66 अंक) ज़रूरी
कुल4004 घंटे

अंक, समय और कटौती नोटिस से लिए गए हैं। नोटिस हर प्रश्न-पत्र में प्रश्नों की संख्या तय नहीं करता, इसलिए परीक्षा के दिन प्रश्न-पुस्तिका के कवर पर लिखे निर्देश ध्यान से पढ़ें।

नोटिस के कुछ और नियम:

  • दोनों प्रश्न-पत्र अनिवार्य हैं। जो उम्मीदवार दोनों प्रश्न-पत्रों में शामिल नहीं होता, उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।
  • भाषा: प्रश्न-पत्र हिंदी और अंग्रेज़ी, दोनों में होते हैं।
  • प्रतिपूरक समय: दृष्टिहीनता, चलन-दिव्यांगता (दोनों भुजाएँ प्रभावित) या प्रमस्तिष्क पक्षाघात (सेरेब्रल पाल्सी) वाले उम्मीदवारों को परीक्षा के हर घंटे पर बीस मिनट अतिरिक्त मिलते हैं। अन्य बेंचमार्क दिव्यांगता श्रेणियों के उम्मीदवार यह समय तब पा सकते हैं जब वे नोटिस में दिए गए प्रारूप में किसी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान का प्रमाणपत्र दें कि उन्हें लिखने में शारीरिक कठिनाई है।
  • मुख्य परीक्षा के लिए कितने उम्मीदवार: उस वर्ष भरी जाने वाली अनुमानित रिक्तियों के लगभग बारह से तेरह गुना।

खंड-वार जानकारी और पाठ्यक्रम के लिए UPSC प्रारंभिक परीक्षा पैटर्न पेज और CSAT पाठ्यक्रम देखें।

ऋणात्मक अंकन: हर गलत उत्तर पर एक-तिहाई

हर प्रश्न के चार विकल्प होते हैं। नोटिस के परिशिष्ट I, खंड I की टिप्पणी II तीन नियम तय करता है:

  1. हर गलत उत्तर पर उस प्रश्न के लिए तय अंकों का एक-तिहाई काटा जाता है।
  2. एक से ज़्यादा विकल्प चुनने को गलत उत्तर माना जाता है, भले ही चुने गए विकल्पों में से एक सही हो।
  3. खाली छोड़े गए प्रश्न पर कोई कटौती नहीं होती।

नोटिस इस कटौती को प्रश्न के अंकों का "एक-तिहाई (0.33)" बताता है।

इस एक-तिहाई नियम का एक सीधा नतीजा है। मान लीजिए किसी प्रश्न के अंक M हैं। अगर आप चार विकल्पों में से बिना सोचे अंदाज़ा लगाते हैं, तो औसतन 4 में से 1 बार सही और 3 बार गलत होंगे: (1/4 × M) − (3/4 × M/3) = M/4 − M/4 = 0। यानी सिर्फ़ अंदाज़े से औसतन कुछ नहीं मिलता। अगर आप एक विकल्प पक्के तौर पर हटा सकें और बचे तीन में से अंदाज़ा लगाएँ, तो औसत (1/3 × M) − (2/3 × M/3) = M/9 हो जाता है, जो शून्य से ज़्यादा है। इसीलिए यह बहुत मायने रखता है कि कोई प्रश्न विकल्प हटाने की गुंजाइश कितनी देता है।

CSAT अर्हक है, और प्रारंभिक परीक्षा के अंक अंतिम योग्यता-क्रम में नहीं जुड़ते

नोटिस के परिशिष्ट I, खंड I की टिप्पणी I कहती है कि UPSC मुख्य परीक्षा के योग्य उम्मीदवारों की सूची दो शर्तों पर बनाता है:

  • सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र II (CSAT) में कम से कम 33%, यानी 200 में से 66 अंक; और
  • सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र I में आयोग द्वारा तय किए गए कुल अर्हक अंक।

यानी CSAT के अंक प्रश्न-पत्र I के अंकों में नहीं जोड़े जाते, लेकिन CSAT में 66 अंक न आने पर आप सूची में नहीं आएँगे, चाहे प्रश्न-पत्र I में कितना भी अच्छा किया हो। प्रश्न-पत्र I के अर्हक अंक कोई तय संख्या नहीं हैं; आयोग इन्हें हर वर्ष तय करता है।

नोटिस यह भी कहता है कि प्रारंभिक परीक्षा "केवल एक छँटनी परीक्षा" है। मुख्य परीक्षा के लिए चुने गए उम्मीदवारों के प्रारंभिक परीक्षा के अंक उनके अंतिम योग्यता-क्रम में नहीं गिने जाते। अंतिम रैंकिंग मुख्य परीक्षा के उन लिखित प्रश्न-पत्रों से, जो रैंकिंग में गिने जाते हैं, और साक्षात्कार/व्यक्तित्व परीक्षण से बनती है।

कथन-आधारित प्रश्नों के प्रारूप

कथन-आधारित प्रश्नों में कुछ कथन या युग्म दिए जाते हैं और आपको उन्हें परखना होता है। आम प्रारूप हैं: कूट वाला प्रारूप (जैसे "केवल 1 और 2" वाले विकल्प), "कितने" वाला प्रारूप, युग्म मिलान, और कथन-I/कथन-II। UPSC इन्हें असल में कैसे इस्तेमाल करता है, यह देखने के लिए हमारे पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र पेज पर मूल प्रश्न-पत्र पढ़ें।

नीचे के उदाहरण हमारे अपने हैं, जो सिर्फ़ ढाँचा समझाने के लिए लिखे गए हैं। ये UPSC के प्रश्न नहीं हैं।

प्रारूप 1: "उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?"

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. प्रकाश हवा की तुलना में पानी में तेज़ चलता है।
  2. ध्वनि निर्वात में नहीं चल सकती।
  3. ज़्यादा ऊँचाई पर पानी कम तापमान पर उबलता है।

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं? (a) केवल एक (b) केवल दो (c) तीनों (d) कोई नहीं

कथन 1 गलत है और कथन 2 और 3 सही हैं, इसलिए उत्तर है (b) केवल दो।

प्रारूप 2: "कितने युग्म सही सुमेलित हैं?"

स्मारकशहर
चारमीनारहैदराबाद
हवा महलजयपुर
विक्टोरिया मेमोरियलचेन्नई

उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं? (a) केवल एक (b) केवल दो (c) तीनों (d) कोई नहीं

विक्टोरिया मेमोरियल कोलकाता में है, इसलिए केवल पहले दो युग्म सही हैं: (b)।

प्रारूप 3: कथन-I और कथन-II

कथन-I: बर्फ़ तरल पानी पर तैरती है। कथन-II: बर्फ़ का घनत्व तरल पानी से कम होता है।

उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है? (a) दोनों कथन सही हैं और कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है (b) दोनों कथन सही हैं, पर कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता (c) कथन-I सही है, पर कथन-II गलत है (d) कथन-I गलत है, पर कथन-II सही है

दोनों कथन सही हैं और कम घनत्व ही बर्फ़ के तैरने का कारण है, इसलिए उत्तर (a) है। यहाँ आपको तीन फ़ैसले करने होते हैं: क्या कथन-I सही है, क्या कथन-II सही है, और क्या II, I की व्याख्या करता है।

ये प्रारूप विकल्प हटाने की गुंजाइश क्यों कम करते हैं

कूट वाले प्रारूप में विकल्प ख़ास कथनों के नाम लेते हैं। अगर आपको पक्का पता है कि कोई एक कथन गलत है, तो उस कथन वाला हर विकल्प हट जाता है। अक्सर दो कथन जानना ही एक विकल्प तक पहुँचने के लिए काफ़ी होता है।

"कितने" वाले प्रारूप में विकल्प सिर्फ़ गिनती बताते हैं। एक कथन जानने से गिनती के बारे में लगभग कुछ पता नहीं चलता। ऊपर का पहला उदाहरण लीजिए:

आपको क्या पक्का पता हैकूट वाला प्रारूप ("केवल 2 और 3", "1, 2 और 3" जैसे विकल्प)"कितने" वाला प्रारूप
सिर्फ़ यह कि कथन 1 गलत है1 वाला हर विकल्प हट जाता है"तीनों" हट जाता है; तीन विकल्प बचते हैं
कथन 1 और 2 (1 गलत, 2 सही)आमतौर पर एक विकल्प बचता है"केवल एक" या "केवल दो" अब भी संभव
तीनों कथनएक उत्तरएक उत्तर

"कितने" वाले प्रश्न का पक्का उत्तर देने के लिए आपको हर कथन परखना होगा। युग्म मिलान भी इसी तरह काम करता है, क्योंकि सही गिनती के लिए हर युग्म जाँचना पड़ता है। कथन-I/कथन-II वाले प्रश्नों में दोनों तथ्य जानना काफ़ी नहीं, जब तक यह भी न पता हो कि एक दूसरे की व्याख्या करता है या नहीं; इसीलिए विकल्प (a) और (b) में फ़र्क़ करना कठिन होता है।

एक-तिहाई कटौती के साथ मिलकर इसका मतलब है कि आधा-अधूरा जाना हुआ प्रश्न अक्सर जितना दिखता है, उससे ज़्यादा एक अंधे अंदाज़े के क़रीब होता है। अभ्यास का एक तरीका यह है कि हर कथन पर निशान लगाएँ कि आप पक्के हैं, अनिश्चित हैं या कुछ पता नहीं, और उत्तर तभी दें जब आपके पक्के कथन सच में विकल्प तय कर दें।

इस योजना का उपयोग कैसे करें

  1. सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र I को अंक दिलाने वाला प्रश्न-पत्र मानकर योजना बनाएँ। प्रारंभिक परीक्षा में यही अकेला प्रश्न-पत्र है जो मुख्य परीक्षा की सूची तय करता है, इसलिए तैयारी का ज़्यादातर समय यहीं लगता है।
  2. CSAT को नज़रअंदाज़ न करें। यह अर्हक है, पर 200 में से 66 अंक लाने ही होंगे। अपनी स्थिति जानने के लिए शुरुआत में ही समय बाँधकर एक CSAT प्रश्न-पत्र हल करें।
  3. इन प्रारूपों का समयबद्ध अभ्यास करें। हर कथन को अलग-अलग परखने की आदत डालें, क्योंकि "कितने" और युग्म वाले प्रश्न यही माँगते हैं।
  4. अपनी सटीकता पर नज़र रखें। गिनें कि हल किए गए प्रश्नों में से कितने गलत होते हैं; एक-तिहाई कटौती के साथ ज़्यादा गलतियाँ सही उत्तरों का फ़ायदा जल्दी ख़त्म कर देती हैं।

एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन के साथ सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र I और CSAT के पूरे टेस्ट हमारे लाइव UPSC टेस्ट में दें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UPSC प्रारंभिक परीक्षा की योजना क्या है?

दो अनिवार्य वस्तुनिष्ठ प्रश्न-पत्र, हर एक 200 अंक और दो घंटे का: सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र I और सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र II (CSAT)। दोनों प्रश्न-पत्र हिंदी और अंग्रेज़ी में होते हैं। प्रश्न-पत्र I से तय होता है कि मुख्य परीक्षा के लिए कौन चुना जाएगा; CSAT अर्हक है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा में ऋणात्मक अंकन कितना है?

हर गलत उत्तर पर उस प्रश्न के लिए तय अंकों का एक-तिहाई (0.33) काटा जाता है। एक से ज़्यादा विकल्प चुनना गलत उत्तर माना जाता है। खाली छोड़े गए प्रश्न पर कोई कटौती नहीं होती।

CSAT में अर्हता के लिए कितने अंक चाहिए?

CSAT एक अर्हक प्रश्न-पत्र है, जिसमें न्यूनतम अर्हक अंक 33% हैं, यानी 200 में से 66। इसके अंक सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र I के अंकों में नहीं जोड़े जाते।

क्या UPSC प्रारंभिक परीक्षा के अंक अंतिम योग्यता-क्रम में गिने जाते हैं?

नहीं। नोटिस प्रारंभिक परीक्षा को केवल एक छँटनी परीक्षा कहता है, और मुख्य परीक्षा के लिए चुने गए उम्मीदवारों के प्रारंभिक परीक्षा के अंक अंतिम योग्यता-क्रम में नहीं गिने जाते।

UPSC में 'उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं' का क्या मतलब है?

इसमें विकल्प सिर्फ़ गिनती बताते हैं, जैसे 'केवल एक', 'केवल दो', 'तीनों' या 'कोई नहीं'। सही गिनती चुनने के लिए आपको हर कथन परखना होता है, इसलिए एक कथन जानने से शायद ही कोई विकल्प हटता है।

क्या यही UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2027 की अंतिम योजना है?

यह लेख 2026 के नोटिस (सं. 05/2026-CSE) पर आधारित है। 2027 की योजना उस वर्ष के नोटिस से तय होगी, इसलिए किसी बदलाव के लिए upsc.gov.in पर उसे ज़रूर देखें।

स्रोत

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