प्रलय मिसाइल परीक्षण नवंबर 2026: ओडिशा तट पर DRDO का यूज़र ट्रायल, सेना में शामिल होना निकट

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एक पंक्ति में: 5 नवंबर 2026 को DRDO ने ओडिशा तट के पास डॉ. APJ अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल प्रलय का उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण किया; सभी उद्देश्य पूरे हुए और रक्षा मंत्रालय के अनुसार अब इसका सेना में शामिल होना निकट है।

मुख्य तथ्य

  • मिसाइलप्रलय, स्वदेशी अर्ध-बैलिस्टिक (क्वासी-बैलिस्टिक) मिसाइल
  • परीक्षण तिथि5 नवंबर 2026, लगभग 11:10 बजे
  • प्रक्षेपण स्थलडॉ. APJ अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा तट के पास
  • ट्रैकिंगएकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर के रेंज उपकरण
  • परीक्षण का प्रकारउपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण; सभी उद्देश्य पूरे
  • प्रमुख विकासकर्तारिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद, अन्य DRDO प्रयोगशालाओं के साथ
  • उत्पादन साझेदारभारत डायनामिक्स लिमिटेड (विकास-सह-उत्पादन साझेदारों में से एक)
  • प्रणोदनठोस प्रणोदक (जुलाई 2025 की रक्षा मंत्रालय विज्ञप्ति के अनुसार)

घटनाक्रम

  1. 28-29 जुलाई 2025लगातार दो उड़ान परीक्षणों से अधिकतम और न्यूनतम रेंज की पुष्टि; पहले चरण के यूज़र ट्रायल पूरे
  2. 31 दिसंबर 2025ओडिशा तट से यूज़र ट्रायल में दो प्रलय मिसाइलों का तेज़ी से एक के बाद एक (साल्वो) प्रक्षेपण
  3. 5 नवंबर 2026डॉ. APJ अब्दुल कलाम द्वीप से नया उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण; सेना में शामिल होना निकट बताया गया

आपकी परीक्षा के लिए क्यों ज़रूरी

  • UPSCसामान्य अध्ययन III: विज्ञान और प्रौद्योगिकी, रक्षा प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण; प्रारंभिक परीक्षा: मिसाइलों के प्रकार, विकासकर्ता प्रयोगशाला और परीक्षण स्थल
  • CDS/NDAसामान्य जागरूकता: भारत की मिसाइल प्रणालियाँ, DRDO की प्रयोगशालाएँ, ओडिशा की परीक्षण रेंज
  • SSCस्थैतिक और समसामयिक GK: प्रलय मिसाइल, DRDO, रिसर्च सेंटर इमारत, डॉ. APJ अब्दुल कलाम द्वीप
  • Bankingकरंट अफेयर्स: नवंबर 2026 के रक्षा परीक्षण, उत्पादन साझेदार के रूप में भारत डायनामिक्स लिमिटेड
  • Railwaysसामान्य जागरूकता के एक-पंक्ति तथ्य: प्रलय को किसने विकसित किया और इसका परीक्षण कहाँ हुआ

मुख्य शब्द

अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल (Quasi-ballistic missile)
ऐसी मिसाइल जो सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल की तुलना में नीचा और समतल मार्ग अपनाती है और उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती है, जिससे उसका अनुमान लगाना और उसे रोकना कठिन होता है।
उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण (User evaluation trial)
वह परीक्षण जो हथियार का उपयोग करने वाली सेनाओं के लिए और उनकी उपस्थिति में किया जाता है, ताकि शामिल करने से पहले जाँचा जा सके कि हथियार उनकी आवश्यकताओं पर खरा है।
विकास-सह-उत्पादन साझेदार (DcPP)
विकास के चरण में ही जोड़ा गया उद्योग साझेदार, ताकि प्रणाली को मंज़ूरी मिलते ही वह उसका निर्माण कर सके।
एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर
ओडिशा में DRDO की रेंज, जिसके रडार, टेलीमेट्री और ट्रैकिंग उपकरण मिसाइल की उड़ान का डेटा दर्ज करते हैं।

क्या हुआ

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 5 नवंबर 2026 को लगभग 11:10 बजे ओडिशा तट के पास स्थित डॉ. APJ अब्दुल कलाम द्वीप से अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल प्रलय का उड़ान परीक्षण किया। उसी शाम जारी रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार परीक्षण के सभी उद्देश्य पूरी तरह हासिल हुए। इसकी पुष्टि एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर द्वारा लगाए गए रेंज उपकरणों से मिले उड़ान डेटा से हुई।

यह प्रक्षेपण एक उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण था, जो DRDO के वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग के प्रतिनिधियों और रक्षा बलों के कर्मियों की उपस्थिति में हुआ। मंत्रालय ने कहा कि इस सफलता के साथ इस प्रणाली का सेना में शामिल होना अब निकट है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, रक्षा बलों और उद्योग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मिसाइल की उन्नत तकनीकें उभरते खतरों के विरुद्ध सेना की तकनीकी क्षमताओं और परिचालन तैयारी को और बढ़ाएँगी। रक्षा सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने भी टीमों को बधाई दी।

पृष्ठभूमि

पिछले लगभग डेढ़ वर्ष में प्रलय के कई यूज़र ट्रायल हो चुके हैं:

  • 28 और 29 जुलाई 2025: डॉ. APJ अब्दुल कलाम द्वीप से लगातार दो उड़ान परीक्षणों में मिसाइल की अधिकतम और न्यूनतम रेंज की पुष्टि हुई। DRDO के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने कहा था कि पहले चरण के इन परीक्षणों के पूरा होने से निकट भविष्य में इसे शामिल करने का रास्ता खुल गया है। भारतीय वायुसेना और भारतीय थलसेना के प्रतिनिधियों ने ये परीक्षण देखे।
  • 31 दिसंबर 2025: DRDO ने ओडिशा तट से दो प्रलय मिसाइलों का साल्वो प्रक्षेपण किया, यानी दोनों मिसाइलें तेज़ी से एक के बाद एक दागी गईं। यह भी उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण का हिस्सा था, जिसे वायुसेना और थलसेना के अधिकारियों ने देखा।

नवंबर 2026 का परीक्षण इसी क्रम की अगली कड़ी है। आधिकारिक भाषा भी बदली है: जुलाई 2025 में "निकट भविष्य में" शामिल करने की बात थी, अब इसे "निकट" (imminent) बताया गया है।

मुख्य विवरण

बिंदुविवरण
मिसाइलप्रलय, स्वदेशी अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल
तिथि और समय5 नवंबर 2026, लगभग 11:10 बजे
प्रक्षेपण स्थलडॉ. APJ अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा तट के पास
उड़ान डेटाITR, चांदीपुर के रेंज उपकरण
परीक्षण का स्वरूपउपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण
प्रमुख प्रयोगशालारिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद
उत्पादकभारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL), विकास-सह-उत्पादन साझेदारों में से एक
परिणामसभी उद्देश्य पूरे; सेना में शामिल होना "निकट"

पहले की आधिकारिक विज्ञप्तियों से मिलने वाली अतिरिक्त जानकारी:

  • प्रलय एक ठोस प्रणोदक वाली अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसमें उच्च सटीकता के लिए अत्याधुनिक मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणाली है (जुलाई 2025 विज्ञप्ति)।
  • यह अलग-अलग प्रकार के लक्ष्यों के विरुद्ध कई प्रकार के वारहेड ले जा सकती है (जुलाई 2025 विज्ञप्ति)।
  • RCI के अलावा DRDL, ASL, ARDE, HEMRL, DMRL, TBRL, R&DE (Engineers) और ITR जैसी DRDO प्रयोगशालाएँ इसमें शामिल रहीं; जुलाई 2025 में उद्योग साझेदार के रूप में BDL और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) तथा अन्य उद्योगों और MSMEs के नाम दिए गए थे।

नवंबर 2026 की विज्ञप्ति में रेंज, पेलोड के भार या लॉन्चर का विवरण नहीं दिया गया है, इसलिए वे आँकड़े यहाँ नहीं दिए गए हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

  • सटीक प्रहार: उड़ान के दौरान दिशा बदलने वाली अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल को अनुमानित बैलिस्टिक मार्ग वाली मिसाइल की तुलना में रोकना कठिन होता है। इससे सेनाओं को सटीक प्रहार का ऐसा विकल्प मिलता है जिसे रोकना कठिन है।
  • शामिल होने के करीब: यूज़र ट्रायल किसी हथियार के सेवा में आने से पहले का अंतिम चरण होता है; मंत्रालय अब इसे निकट बता रहा है।
  • आत्मनिर्भरता: मिसाइल का डिज़ाइन DRDO प्रयोगशालाओं ने किया है और उत्पादन सार्वजनिक क्षेत्र का साझेदार (BDL) कर रहा है, जो रक्षा प्रणालियों के स्वदेशीकरण के प्रयास के अनुरूप है।
  • उद्योग की तैयारी: विकास के दौरान ही उत्पादन साझेदार को जोड़ने का उद्देश्य सफल परीक्षण और बड़े पैमाने पर उत्पादन के बीच का समय घटाना है।

मुद्दे और आलोचना

  • सीमित सार्वजनिक जानकारी: नवीनतम विज्ञप्ति में रेंज या पेलोड के आँकड़े नहीं हैं, इसलिए आधिकारिक सामग्री से परीक्षण की गई क्षमता का स्वतंत्र आकलन नहीं किया जा सकता।
  • परीक्षण से सेवा तक: "निकट" शामिल होना उत्पादन ऑर्डर, आपूर्ति की समय-सारणी और प्रशिक्षण पर निर्भर है, जिनका विज्ञप्ति में उल्लेख नहीं है।
  • लागत और संख्या: विज्ञप्ति यह नहीं बताती कि सेनाओं के लिए कितनी मिसाइलें या इकाइयाँ प्रस्तावित हैं।

आगे की राह

  • शेष यूज़र ट्रायल और सेनाओं द्वारा औपचारिक स्वीकृति पूरी करना।
  • BDL और उसकी आपूर्ति शृंखला में बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाना, ताकि जल्दी शामिल किया जा सके।
  • प्रलय को थलसेना और वायुसेना की संयुक्त मारक योजनाओं में जोड़ना; इन दोनों के प्रतिनिधि पहले के परीक्षण देख चुके हैं।
  • विश्वसनीयता पर भरोसा बढ़ाने के लिए साल्वो प्रक्षेपण सहित वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण जारी रखना।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

  • प्रलय DRDO द्वारा विकसित एक स्वदेशी अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है।
  • प्रमुख प्रयोगशाला: रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद।
  • उत्पादन साझेदार: भारत डायनामिक्स लिमिटेड।
  • नवीनतम परीक्षण: 5 नवंबर 2026, ओडिशा तट के पास डॉ. APJ अब्दुल कलाम द्वीप से, उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण के रूप में।
  • उड़ान डेटा एकीकृत परीक्षण रेंज, चांदीपुर से मिला।
  • पहले के यूज़र ट्रायल: 28-29 जुलाई 2025 को लगातार दो परीक्षण (अधिकतम और न्यूनतम रेंज) और 31 दिसंबर 2025 को दो मिसाइलों का साल्वो प्रक्षेपण।
  • इसमें ठोस प्रणोदक का उपयोग होता है और यह कई प्रकार के वारहेड ले जा सकती है (रक्षा मंत्रालय, जुलाई 2025)।

SSC, बैंकिंग और रेलवे के लिए एक पंक्ति के तथ्य

  • प्रलय DRDO द्वारा विकसित अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है।
  • प्रलय का उड़ान परीक्षण 5 नवंबर 2026 को ओडिशा तट के पास हुआ।
  • प्रक्षेपण स्थल: डॉ. APJ अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा।
  • विकासकर्ता प्रयोगशाला: रिसर्च सेंटर इमारत, हैदराबाद; उत्पादक: भारत डायनामिक्स लिमिटेड।
  • विज्ञप्ति के अनुसार वर्तमान DRDO अध्यक्ष: राजेश कुमार सिंह, जो रक्षा सचिव भी हैं।

ऐसे और तथ्यों के लिए हिंदी करंट अफेयर्स देखें या SSC CGL हिंदी पेज पर जाएँ।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: "प्रलय जैसी स्वदेशी सामरिक मिसाइलें दिखाती हैं कि भारत का रक्षा अनुसंधान डिज़ाइन से तैनाती तक कितना आगे बढ़ा है।" यूज़र ट्रायल और उद्योग साझेदारी की भूमिका के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

उत्तर में शामिल करने योग्य बिंदु:

  • अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल क्या है और सटीक प्रहार के लिए यह क्यों उपयोगी है।
  • यूज़र ट्रायल का क्रम (जुलाई 2025, दिसंबर 2025, नवंबर 2026) और उपयोगकर्ता मूल्यांकन का महत्व।
  • विकास-सह-उत्पादन साझेदार मॉडल (BDL ने प्रणाली का उत्पादन किया), BEL सहित व्यापक उद्योग साझेदारी, और जल्दी शामिल करने में उसकी भूमिका।
  • शेष कमियाँ: उत्पादन का पैमाना, समय-सीमा और क्षमता के बारे में पारदर्शिता।
क्विज़ लोड हो रही है…

स्रोत

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