फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय योजना 2031 तक बढ़ी: दुष्कर्म और POCSO मामलों के लिए Rs 3,788 करोड़

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एक पंक्ति में: 4 नवंबर 2026 को कैबिनेट ने दुष्कर्म और POCSO मामलों की फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय योजना को Rs 3,788.04 करोड़ के साथ 31 मार्च 2031 तक बढ़ाया; केंद्र का Rs 2,353.15 करोड़ हिस्सा निर्भया फंड से आएगा।

मुख्य तथ्य

  • निर्णयफास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (विशिष्ट POCSO न्यायालयों सहित) की केंद्र प्रायोजित योजना जारी
  • मंज़ूरी4 नवंबर 2026, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल
  • अवधि1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 (वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31)
  • कुल परिव्ययRs 3,788.04 करोड़
  • केंद्र का हिस्साRs 2,353.15 करोड़, निर्भया फंड से
  • राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों का हिस्साRs 1,434.89 करोड़
  • योजना की शुरुआत2 अक्टूबर 2019
  • कार्यान्वयन विभागन्याय विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय

घटनाक्रम

  1. 2018आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 से दुष्कर्म के लिए कठोर सज़ा; FTSC का रास्ता खुला
  2. 25 जुलाई 2019सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान WP (Crl) No. 1/2019 में 100 से अधिक POCSO मामलों वाले ज़िलों में विशिष्ट POCSO न्यायालय बनाने का निर्देश दिया
  3. 2 अक्टूबर 2019FTSC योजना एक वर्ष के लिए शुरू (अगस्त 2019 में तैयार)
  4. मार्च 2023दो वर्ष के विस्तार के बाद योजना 31 मार्च 2023 तक चली
  5. नवंबर 2023कैबिनेट ने Rs 1,952.23 करोड़ के परिव्यय के साथ योजना 31 मार्च 2026 तक बढ़ाई
  6. 4 नवंबर 2026कैबिनेट ने Rs 3,788.04 करोड़ के साथ योजना पाँच वर्ष, 31 मार्च 2031 तक जारी रखी

आपकी परीक्षा के लिए क्यों ज़रूरी

  • UPSCGS II: न्यायपालिका, केंद्र प्रायोजित योजनाएँ, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा; GS I: सामाजिक सशक्तिकरण
  • SSCस्थिर + समसामयिक: POCSO अधिनियम 2012, निर्भया फंड, योजना की शुरुआत की तारीख और नया परिव्यय
  • Bankingसरकारी योजनाएँ: परिव्यय Rs 3,788.04 करोड़, केंद्र Rs 2,353.15 करोड़, अवधि 2030-31 तक
  • Railwaysएक पंक्ति के तथ्य: FTSC योजना 2 अक्टूबर 2019 को शुरू; कार्यान्वयन न्याय विभाग द्वारा
  • State PSCकेंद्र-राज्य वित्त पोषण (60:40, विशेष श्रेणी राज्यों के लिए 90:10) और न्यायालय स्थापित करने में राज्यों की भूमिका

मुख्य शब्द

फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (FTSC)
ऐसा समर्पित न्यायालय जो केवल दुष्कर्म और POCSO अधिनियम के मामले सुनता है, ताकि सुनवाई जल्दी पूरी हो
विशिष्ट POCSO न्यायालय (e-POCSO)
ऐसा FTSC जो केवल लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 के मामले सुनता है
केंद्र प्रायोजित योजना (CSS)
ऐसी योजना जिसे राज्य चलाते हैं, पर खर्च केंद्र और राज्य तय अनुपात में मिलकर उठाते हैं
निर्भया फंड
महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं के लिए समर्पित केंद्रीय कोष; FTSC योजना में केंद्र का हिस्सा इसी से आता है
संवेदनशील गवाह बयान केंद्र (VWDC)
न्यायालय में बच्चों और पीड़ितों के अनुकूल स्थान, जहाँ संवेदनशील गवाह अपना बयान दर्ज कराते हैं

क्या हुआ

4 नवंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) की केंद्र प्रायोजित योजना को, विशिष्ट POCSO न्यायालयों सहित, अगले पाँच वर्ष, यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 (वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31) तक जारी रखने की मंज़ूरी दी। ये न्यायालय दुष्कर्म और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत अपराधों के मामलों की सुनवाई करते हैं।

कुल परिव्यय Rs 3,788.04 करोड़ है। इसमें से Rs 2,353.15 करोड़ केंद्र निर्भया फंड से देगा, और राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश मिलकर Rs 1,434.89 करोड़ वहन करेंगे। प्रधानमंत्री ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे कम देरी से तेज़ न्याय की ओर कदम बताया। DD News के अनुसार उन्होंने इसके साथ मंत्रिमंडल के अन्य हाल के फ़ैसलों का भी स्वागत किया, जिनमें ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण (VGF) योजना, VISTAR सांख्यिकी पहल और महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की एक योजना शामिल हैं।

पृष्ठभूमि

यह योजना दो घटनाक्रमों से निकली:

  • आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018, जिसने दुष्कर्म के लिए कठोर सज़ा, कुछ मामलों में मृत्युदंड तक, का प्रावधान किया और FTSC के गठन का रास्ता खोला।
  • सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2019 के निर्देश, जो स्वतः संज्ञान रिट याचिका (आपराधिक) संख्या 1/2019 में दिए गए। इनमें कहा गया कि जिन ज़िलों में POCSO अधिनियम के 100 से अधिक मामले हैं, वहाँ विशिष्ट POCSO न्यायालय बनें।

न्याय विभाग (विधि और न्याय मंत्रालय) ने अगस्त 2019 में योजना तैयार की और इसे 2 अक्टूबर 2019 को शुरू में एक वर्ष के लिए लागू किया। फिर इसे 31 मार्च 2023 तक बढ़ाया गया। नवंबर 2023 में कैबिनेट ने इसे दोबारा 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया, जिसका परिव्यय Rs 1,952.23 करोड़ था (केंद्र Rs 1,207.24 करोड़ निर्भया फंड से, राज्य Rs 744.99 करोड़)। ताज़ा निर्णय तीसरा विस्तार है और पहली बार पूरे पाँच वर्ष के चक्र के लिए है।

मुख्य विवरण

मद2023-26 चक्र2026-31 चक्र
अवधि1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 20261 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031
कुल परिव्ययRs 1,952.23 करोड़Rs 3,788.04 करोड़
केंद्र का हिस्सा (निर्भया फंड)Rs 1,207.24 करोड़Rs 2,353.15 करोड़
राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों का हिस्साRs 744.99 करोड़Rs 1,434.89 करोड़

योजना कैसे काम करती है (मार्च 2025 में PIB के विवरण के अनुसार):

  • वित्त पोषण का अनुपात: केंद्र और राज्य खर्च 60:40 में बाँटते हैं। पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम और पहाड़ी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के लिए यह अनुपात 90:10 है; बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों का पूरा खर्च केंद्र उठाता है।
  • किस पर खर्च: हर न्यायालय के लिए एक न्यायिक अधिकारी और सात सहायक कर्मचारी, साथ ही चालू खर्च और न्यायालयों को बच्चों व महिलाओं के अनुकूल बनाने के लिए फ्लेक्सी-अनुदान।
  • राशि जारी करना: राज्य व्यय विवरण भेजते हैं, उसके बाद केंद्र अपना हिस्सा प्रतिपूर्ति के आधार पर देता है।
  • लक्ष्य: हर न्यायालय से वर्ष में कम से कम 165 मामले (हर तिमाही 41-42) निपटाने की अपेक्षा है।
  • राज्यों की भूमिका: न्यायालय स्थापित करना और चलाना राज्य सरकारों का काम है, जो अपने उच्च न्यायालयों से परामर्श करके करती हैं; केंद्र धन देता है और निगरानी करता है।
  • निगरानी: न्याय विभाग न्यायालयों और मामलों के आँकड़े एक ऑनलाइन FTSC डैशबोर्ड पर प्रकाशित करता है।

मौजूदा स्थिति। न्याय विभाग के FTSC डैशबोर्ड के अनुसार (जिस पर आँकड़ों की तारीख नहीं दी गई है) 774 FTSC कार्यरत हैं, जिनमें 398 विशिष्ट POCSO न्यायालय हैं। शुरुआत से अब तक 3,61,055 मामले निपटाए जा चुके हैं और 2,44,935 मामले लंबित हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

  • त्वरित सुनवाई एक अधिकार: लैंगिक अपराधों के मामलों में जल्दी सुनवाई से पीड़ितों का मानसिक आघात कम होता है, जिनमें बहुत से बच्चे हैं। यह उस त्वरित सुनवाई के अधिकार की भी रक्षा करती है जिसे न्यायालय अनुच्छेद 21 में शामिल मानते हैं।
  • निवारक प्रभाव: जल्दी दोषसिद्धि या दोषमुक्ति से कानून विश्वसनीय बनता है और गवाहों पर दबाव सीमित रहता है।
  • लंबी अवधि: पाँच वर्ष की मंज़ूरी, जो कई योजनाओं के 2026-31 चक्र के अनुरूप है, राज्यों को न्यायाधीशों, अभियोजकों और कर्मचारियों की भर्ती के लिए निश्चितता देती है।
  • सहकारी संघवाद: यह राज्य के विषय (अधीनस्थ न्यायालयों में न्याय प्रशासन) को साझा खर्च वाली योजना के ज़रिए केंद्र द्वारा धन देने का स्पष्ट उदाहरण है।

मुद्दे और आलोचना

  • लंबित मामले अब भी अधिक: न्याय विभाग के डैशबोर्ड के अनुसार इन न्यायालयों में लगभग 2.45 लाख मामले लंबित हैं, यानी क्षमता अभी माँग से कम है।
  • मूल्यांकन में उठी कमियाँ: भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) के 2023 के तृतीय-पक्ष मूल्यांकन ने, जिसका हवाला सरकार ने दिया, योजना जारी रखने की सिफ़ारिश की। साथ ही उसने POCSO मामलों में अनुभवी विशेष न्यायाधीशों, अधिक महिला लोक अभियोजकों, संवेदनशीलता प्रशिक्षण, न्यायालयों में बेहतर तकनीक, समय पर DNA रिपोर्ट के लिए मज़बूत फ़ोरेंसिक प्रयोगशालाओं, सभी ज़िलों में VWDC और हर FTSC में एक बाल मनोवैज्ञानिक की ज़रूरत बताई। ये सिफ़ारिशें दिखाती हैं कि कई अड़चनें अदालत कक्ष के बाहर हैं।
  • राज्यों पर निर्भरता: न्यायालय राज्य अपने उच्च न्यायालयों के साथ स्थापित करते और चलाते हैं, इसलिए उन्हें शुरू करने की गति अलग-अलग राज्यों में अलग है।

आगे की राह

  • न्यायिक और अभियोजक पद समय पर भरें और उन्हें विशेष प्रशिक्षण दें।
  • फ़ोरेंसिक और DNA रिपोर्ट में देरी घटाएँ, जो सुनवाई टलने का एक आम कारण है।
  • हर ज़िले में VWDC और बच्चों के अनुकूल अदालत कक्ष बनाएँ।
  • डैशबोर्ड पर न्यायालय-वार निपटान और लंबित मामलों के आँकड़े प्रकाशित करें, ताकि पिछड़ रहे ज़िलों पर ध्यान जाए।
  • तेज़ सुनवाई के साथ पीड़ित मुआवज़ा और सहायता सेवाएँ भी मज़बूत करें।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

  • FTSC योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे न्याय विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय लागू करता है।
  • शुरुआत 2 अक्टूबर 2019 को; आधार आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 और सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान WP (Crl) No. 1/2019।
  • विशिष्ट POCSO न्यायालयों का निर्देश 100 से अधिक POCSO मामलों वाले ज़िलों के लिए था।
  • नया चक्र: 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031, परिव्यय Rs 3,788.04 करोड़।
  • केंद्र का Rs 2,353.15 करोड़ हिस्सा निर्भया फंड से; राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों का हिस्सा Rs 1,434.89 करोड़।
  • वित्त पोषण अनुपात 60:40, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10।
  • हर न्यायालय के लिए एक न्यायिक अधिकारी और सात सहायक कर्मचारियों का खर्च दिया जाता है।

SSC, बैंकिंग और रेलवे के लिए एक पंक्ति के तथ्य

  • कैबिनेट ने 4 नवंबर 2026 को फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय योजना जारी रखने की मंज़ूरी दी।
  • योजना की अवधि: वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 (पाँच वर्ष)।
  • कुल परिव्यय: Rs 3,788.04 करोड़।
  • केंद्र का हिस्सा निर्भया फंड से आता है।
  • FTSC में दुष्कर्म और POCSO अधिनियम के अपराधों की सुनवाई होती है।
  • योजना 2 अक्टूबर 2019 को शुरू हुई थी।

SSC की तैयारी कर रहे हैं? SSC CGL हिंदी पेज देखें; रेलवे के लिए RRB NTPC हिंदी पेज पर जाएँ।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: "फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों ने दुष्कर्म और POCSO मामलों के निपटान में सुधार किया है, पर केवल गति से न्याय नहीं मिलता।" FTSC योजना के 2031 तक विस्तार के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

उत्तर में शामिल करने योग्य बिंदु:

  1. योजना की उत्पत्ति (2018 का संशोधन, 2019 के सुप्रीम कोर्ट निर्देश) तथा 2026-31 का नया परिव्यय और वित्त पोषण अनुपात।
  2. उपलब्धियाँ: समर्पित न्यायालय, आधिकारिक डैशबोर्ड के निपटान आँकड़े, बच्चों के अनुकूल प्रक्रियाएँ।
  3. कमियाँ: लंबित मामले, फ़ोरेंसिक देरी, प्रशिक्षित न्यायाधीशों और अभियोजकों की कमी, राज्यों का असमान प्रदर्शन (IIPA के निष्कर्ष)।
  4. आगे की राह: क्षमता निर्माण, फ़ोरेंसिक, VWDC, पीड़ित सहायता और आँकड़ों पर आधारित निगरानी।
क्विज़ लोड हो रही है…

स्रोत

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राजव्यवस्था और शासन में और