भारत लगातार तीसरी बार ISA अध्यक्ष: अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन 2026, नौवीं सभा के मुख्य तथ्य

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एक पंक्ति में: नई दिल्ली में ISA सभा के नौवें सत्र में भारत लगातार तीसरी बार अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का अध्यक्ष और फ्रांस फिर से सह-अध्यक्ष चुना गया; इसकी घोषणा प्रह्लाद जोशी ने 3 नवंबर 2026 को की।

मुख्य तथ्य

  • समाचारभारत लगातार तीसरी बार ISA का अध्यक्ष निर्वाचित
  • घोषणा3 नवंबर 2026, केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, नई दिल्ली
  • मंचISA सभा का नौवाँ सत्र, भारत मंडपम
  • सह-अध्यक्षफ्रांस, फिर निर्वाचित (फ्रांसीसी दूतावास के अनुसार, ANI के माध्यम से: 2027–2029 के लिए, बुर्किना फ़ासो को हराकर)
  • ISA सदस्य130 हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य देश
  • स्थापना2015, भारत और फ्रांस द्वारा, COP21, पेरिस में
  • अफ्रीका सौर सुविधाUSD 200 मिलियन; भारत का योगदान लगभग ₹225 करोड़ (USD 25 मिलियन)
  • महानिदेशकआशीष खन्ना

घटनाक्रम

  1. 2015COP21, पेरिस में भारत और फ्रांस ने मिलकर ISA की शुरुआत की
  2. नवंबर 2024ISA की 7वीं सभा: 2024–2026 के लिए भारत निर्विरोध अध्यक्ष, फ्रांस सह-अध्यक्ष
  3. 11 मार्च 2026नई दिल्ली में ISA का 10वाँ स्थापना दिवस मनाया गया
  4. 2 नवंबर 2026भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन 2026 के साथ भारत मंडपम, नई दिल्ली में ISA की नौवीं सभा शुरू
  5. 3 नवंबर 2026जोशी ने भारत के लगातार तीसरे कार्यकाल की घोषणा की; फ्रांस फिर सह-अध्यक्ष

आपकी परीक्षा के लिए क्यों ज़रूरी

  • UPSCGS II: अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, ग्लोबल साउथ में भारत का नेतृत्व, भारत–फ्रांस संबंध; GS III: नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु वित्त। प्रारंभिक: ISA की उत्पत्ति, सह-अध्यक्ष, अफ्रीका सौर सुविधा
  • SSCस्थैतिक + समसामयिक सामान्य ज्ञान: ISA की स्थापना 2015 में भारत और फ्रांस ने की; भारत तीसरी बार अध्यक्ष; फ्रांस सह-अध्यक्ष
  • Bankingजलवायु वित्त: USD 200 मिलियन की अफ्रीका सौर सुविधा, भारत के USD 25 मिलियन, USD 300 मिलियन का नाइजीरिया DRE फंड
  • Railwaysवन-लाइनर: घोषणा किसने की (प्रह्लाद जोशी), कहाँ (नई दिल्ली), किस सत्र में (ISA सभा का नौवाँ सत्र)
  • State PSCभारत की सौर कूटनीति और ISA सदस्य देशों के लिए PM-KUSUM मॉडल को अपनाने की पहल

मुख्य शब्द

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)
संधि पर आधारित अंतर-सरकारी मंच, जिसे भारत और फ्रांस ने 2015 में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया; इसके 130 हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य देश हैं।
ISA सभा (Assembly)
ISA के सदस्य देशों की बैठक; इसके सत्रों में गठबंधन के अध्यक्ष और सह-अध्यक्ष चुने जाते हैं।
अफ्रीका सौर सुविधा (Africa Solar Facility)
अफ्रीका के विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश जुटाने के लिए ISA की USD 200 मिलियन की सुविधा।
STAR-C
सौर प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग संसाधन केंद्र (Solar Technology Application Resource Centre); प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए ISA का केंद्र, ऐसे 17 केंद्र बनाए जा रहे हैं।
Agri-PV (एग्रीवोल्टाइक्स)
खेतों में सौर पैनल लगाना, ताकि एक ही ज़मीन पर फ़सल भी उगे और सौर बिजली भी बने।

क्या हुआ

भारत को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का लगातार तीसरी बार अध्यक्ष चुना गया है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में इसकी घोषणा की। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की PIB विज्ञप्ति के अनुसार यह संवाददाता सम्मेलन भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी 2026 (Bharat Renewable Energy Summit and Expo 2026) के दौरान हुआ।

यह चुनाव ISA सभा के नौवें सत्र में हुआ, जो इसी शिखर सम्मेलन के साथ भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित हुआ। बैठक से पहले की ANI रिपोर्ट के अनुसार सभा का उद्घाटन 2 नवंबर को और पूर्ण सत्र 3 नवंबर को होना था, जिसकी सह-अध्यक्षता जोशी और फ्रांस के पारिस्थितिक संक्रमण (Ecological Transition) मामलों के मंत्री-प्रतिनिधि मैथ्यू लेफ़ेव्र को करनी थी।

फ्रांस को फिर से सह-अध्यक्ष चुना गया। जोशी ने भारत पर “भरोसा जताने” के लिए सदस्य देशों का धन्यवाद किया और इस परिणाम पर फ्रांस तथा उसके मंत्री को बधाई दी (PIB)। ANI द्वारा उद्धृत फ्रांसीसी दूतावास की विज्ञप्ति के अनुसार फ्रांस ने बुर्किना फ़ासो को हराकर 2027–2029 के लिए सह-अध्यक्ष पद जीता। PIB विज्ञप्ति में भारत के नए कार्यकाल के वर्ष नहीं बताए गए हैं।

पृष्ठभूमि

  • शुरुआत: ISA की शुरुआत भारत और फ्रांस ने मिलकर 2015 में पेरिस में हुए COP21 जलवायु सम्मेलन के दौरान की थी (PIB, ISA स्थापना दिवस विज्ञप्ति)। PIB इसे संधि पर आधारित अंतर-सरकारी मंच बताता है।
  • सदस्यता: 3 नवंबर 2026 को जोशी ने बताया कि ISA के हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य देशों की संख्या 130 है।
  • पिछला कार्यकाल: DD News के अनुसार नवंबर 2024 में नई दिल्ली में हुई ISA की 7वीं सभा में 2024–2026 के लिए भारत निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया था, जबकि फ्रांस ग्रेनाडा के साथ मुकाबले के बाद सह-अध्यक्ष बना था। उसी सत्र में आशीष खन्ना को ISA का तीसरा महानिदेशक बनाया गया।
  • स्थापना दिवस: ISA का 10वाँ स्थापना दिवस 11 मार्च 2026 को नई दिल्ली में मनाया गया (PIB)।

मुख्य बिंदु

विषयविवरण (स्रोत)
भारत को मिला पदISA का अध्यक्ष, लगातार तीसरा कार्यकाल (PIB)
घोषणाप्रह्लाद जोशी, केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री, 3 नवंबर 2026 (PIB)
मंचISA सभा का नौवाँ सत्र, भारत मंडपम, नई दिल्ली (ANI)
सह-अध्यक्षफ्रांस, फिर निर्वाचित; कार्यकाल 2027–2029; बुर्किना फ़ासो को हराया (फ्रांसीसी दूतावास, ANI के माध्यम से)
ISA महानिदेशकआशीष खन्ना (PIB)
सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता130 (PIB)

जोशी द्वारा बताई गई ISA की प्राथमिकताएँ (PIB विज्ञप्ति)

  • वित्त: अफ्रीका के विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश जुटाने के लिए USD 200 मिलियन की अफ्रीका सौर सुविधा (Africa Solar Facility), जिसे भारत की लगभग ₹225 करोड़ (USD 25 मिलियन) की प्रतिबद्धता का समर्थन है; और पूरे अफ्रीका में विस्तार के मॉडल के रूप में USD 300 मिलियन का नाइजीरिया विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा कोष (Nigeria Distributed Renewable Energy Fund)।
  • ज़मीनी परियोजनाएँ: फ़िजी, मेडागास्कर, कोमोरोस और सेशेल्स में ISA समर्थित परियोजनाएँ स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों को बिजली देती हैं, साफ़ पेयजल पहुँचाती हैं और कृषि शीत भंडारण (कोल्ड स्टोरेज) चलाती हैं।
  • छोटे द्वीप देश: मॉरीशस से शुरू करके सौर ऊर्जा और भंडारण (स्टोरेज) के संयुक्त अवसर, जिन्हें लघु द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) के लिए मॉडल बनाया जाएगा।
  • किसान: सौर ऊर्जा के ज़रिए 30 लाख (3 मिलियन) किसानों को सशक्त बनाना और Agri-PV में विस्तार; इसके लिए भारत के PM-KUSUM मॉडल को सदस्य देशों, खासकर अफ्रीका, के अनुसार ढाला जाएगा।
  • क्षमता निर्माण: 17 सौर प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग संसाधन केंद्र (STAR-C), ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर–SHINE (Strategic Hub for Innovation and Execution) और AI-सक्षम ISA अकादमी।

मंत्री ने इस पूरे काम को “Power To Empower” (सशक्त बनाने के लिए ऊर्जा) और “One Sun, One World, One Grid” (एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड) के विचार से जोड़ा।

फ्रांस की प्रतिबद्धताएँ (फ्रांसीसी दूतावास की विज्ञप्ति, ANI के अनुसार): 2026 के लिए ISA को €50,000 का स्वैच्छिक योगदान; 2021 से STAR-C कार्यक्रम के लिए €1.25 मिलियन; और 2025 में अफ्रीका सौर सुविधा को €150,000। विज्ञप्ति ने फ्रांस के इस सहयोग को अंताल्या, तुर्की (9–20 नवंबर) में होने वाले COP31 की तैयारी से जोड़ा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

  • कूटनीतिक प्रतिष्ठा: लगातार तीसरा कार्यकाल दिखाता है कि सदस्य देश उस संस्था में भारत के नेतृत्व पर भरोसा बनाए हुए हैं, जिसका भारत सह-संस्थापक है।
  • ग्लोबल साउथ की आवाज़: PIB के अनुसार ISA अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मंच है, “विशेषकर ग्लोबल साउथ के लिए”। बताई गई अधिकतर प्राथमिकताएँ (अफ्रीका के लिए वित्त, द्वीप देश, किसान) विकासशील देशों पर केंद्रित हैं।
  • वादों से परियोजनाओं तक: जोशी ने कहा कि लक्ष्य “सौर प्रतिबद्धताओं से निवेश तक, साझेदारी से परियोजनाओं तक और महत्वाकांक्षा से प्रभाव तक” पहुँचना है। अफ्रीका के लिए अलग कोष इसकी सबसे स्पष्ट कसौटी हैं।
  • भारत–फ्रांस साझेदारी: भारत अध्यक्ष और फ्रांस सह-अध्यक्ष, यह जोड़ी उसी साझेदारी को आगे बढ़ाती है जिससे 2015 में गठबंधन शुरू हुआ था।
  • ऊर्जा और प्रौद्योगिकी: जोशी का तर्क था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे-जैसे अर्थव्यवस्थाओं को बदल रही है, वैसे-वैसे सस्ती, भरोसेमंद और स्वच्छ बिजली तक पहुँच एक बड़ी रणनीतिक ज़रूरत बनती जा रही है।

मुद्दे और आलोचना

  • कार्यकाल का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं: PIB विज्ञप्ति तीसरे कार्यकाल की पुष्टि करती है, पर उसके शुरू और खत्म होने के वर्ष नहीं बताती; फ्रांस का 2027–2029 का कार्यकाल केवल फ्रांसीसी दूतावास की विज्ञप्ति से पता चलता है। परीक्षा में “लगातार तीसरा कार्यकाल” ही लिखें, तिथियों का अनुमान न लगाएँ।
  • सह-अध्यक्ष पद पर मुकाबला: फ्रांस को बुर्किना फ़ासो को हराना पड़ा (और 2024 में ग्रेनाडा को), जिससे पता चलता है कि दूसरे सदस्य देश भी गठबंधन में नेतृत्व की भूमिका चाहते हैं।
  • वित्त का आकार: अफ्रीका सौर सुविधा (USD 200 मिलियन) और भारत के USD 25 मिलियन, अफ्रीका के विकेंद्रीकृत सौर क्षेत्र की निवेश ज़रूरत की तुलना में छोटे हैं; परिणाम इस पर निर्भर करेगा कि ये कितनी निजी पूँजी आकर्षित करते हैं।
  • क्रियान्वयन: एजेंडे का बड़ा हिस्सा (Agri-PV, STAR-C, SIDS में भंडारण) अभी लागू हो रहा है, इसलिए नतीजों का आकलन नए कार्यकाल में होगा।

आगे की राह

  • ISA के माध्यम से नए पदाधिकारियों और कार्यकाल की तिथियों को प्रकाशित किया जाए, ताकि रिकॉर्ड स्पष्ट रहे।
  • अफ्रीका सौर सुविधा और नाइजीरिया कोष के ज़रिए विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा में निजी और विकास बैंकों का पैसा लाया जाए।
  • सदस्य देशों में तकनीशियनों के प्रशिक्षण के लिए STAR-C और ISA अकादमी का विस्तार हो।
  • मॉरीशस की पायलट परियोजना को दूसरे छोटे द्वीप देशों के लिए नमूना बनाया जाए।
  • COP31 से पहले फ्रांस और दूसरे सदस्य देशों के साथ साझा रुख तय किया जाए।

दोहराने के लिए हिंदी करंट अफेयर्स पढ़ें और पाठ्यक्रम के लिए UPSC प्रारंभिक परीक्षा पेज देखें।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए तथ्य

  • भारत लगातार तीसरी बार ISA का अध्यक्ष चुना गया; घोषणा प्रह्लाद जोशी ने 3 नवंबर 2026 को की।
  • चुनाव ISA सभा के नौवें सत्र में, भारत मंडपम, नई दिल्ली में हुआ।
  • फ्रांस फिर से सह-अध्यक्ष, कार्यकाल 2027–2029, बुर्किना फ़ासो को हराया (फ्रांसीसी दूतावास, ANI के माध्यम से)।
  • ISA की शुरुआत भारत और फ्रांस ने COP21, पेरिस, 2015 में की; 130 हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य देश।
  • ISA के महानिदेशक: आशीष खन्ना।
  • अफ्रीका सौर सुविधा: USD 200 मिलियन; भारत की प्रतिबद्धता लगभग ₹225 करोड़ (USD 25 मिलियन)।
  • 17 STAR-C; GCC–SHINE = Strategic Hub for Innovation and Execution।

SSC, बैंकिंग और रेलवे के लिए वन-लाइनर

  • भारत लगातार तीसरी बार ISA का अध्यक्ष चुना गया है (नवंबर 2026)।
  • ISA का सह-अध्यक्ष: फ्रांस।
  • केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री: प्रह्लाद जोशी।
  • ISA की स्थापना 2015 में भारत और फ्रांस ने की।
  • अफ्रीका के लिए मॉडल के रूप में बताया गया USD 300 मिलियन का कोष: नाइजीरिया विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा कोष।

SSC या रेलवे की तैयारी कर रहे हैं? SSC CGL पेज और RRB NTPC पेज देखें।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

“अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के अध्यक्ष के रूप में भारत का लगातार तीसरा कार्यकाल ग्लोबल साउथ के लिए सौर कूटनीति को ठोस परिणामों में बदलने का अवसर है।” विवेचना कीजिए। (150 शब्द, GS II)

उत्तर में शामिल करें:

  1. ISA की उत्पत्ति (भारत–फ्रांस, COP21, 2015) और भारत का बार-बार अध्यक्ष चुना जाना।
  2. प्राथमिकताएँ: अफ्रीका सौर सुविधा, नाइजीरिया कोष, SIDS में भंडारण, Agri-PV, STAR-C और ISA अकादमी।
  3. सीमाएँ: सीमित वित्त, नेतृत्व के पदों पर मुकाबला, परियोजनाओं का धीमा क्रियान्वयन।
  4. आगे की राह: मिश्रित वित्त (ब्लेंडेड फ़ाइनेंस), प्रशिक्षण, COP31 से पहले भारत–फ्रांस समन्वय।
क्विज़ लोड हो रही है…

स्रोत

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