अगली पीढ़ी के कार्वेट (NGC) अनुबंध 2026: रक्षा मंत्रालय का GRSE और GSL से ₹53,866.50 करोड़ का सौदा

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एक पंक्ति में: 2 नवंबर 2026 को रक्षा मंत्रालय ने नौसेना द्वारा डिज़ाइन किए गए आठ अगली पीढ़ी के कार्वेट (NGC) के लिए GRSE (पाँच पोत) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (तीन पोत) से ₹53,866.50 करोड़ के अनुबंध किए।

मुख्य तथ्य

  • अनुबंध मूल्य₹53,866.50 करोड़ (दो अनुबंध)
  • पोतभारतीय नौसेना के लिए 8 अगली पीढ़ी के कार्वेट (NGC)
  • निर्माताGRSE: 5 पोत; गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL): 3 पोत
  • हस्ताक्षर2 नवंबर 2026, कर्तव्य भवन-2, नई दिल्ली
  • उपस्थितिरक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह
  • पहली बारनौसेना का अपना डिज़ाइन, प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से चुने गए DPSU द्वारा निर्माण
  • रोज़गार (10 वर्ष)शिपयार्डों में ~72 लाख मानव-दिवस + सहायक उद्योगों और MSME में ~460 लाख
  • AoNDAC, 6 जून 2022, तब अनुमानित लागत लगभग ₹36,000 करोड़

घटनाक्रम

  1. 6 जून 2022DAC ने लगभग ₹36,000 करोड़ की अनुमानित लागत पर NGC के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) दी
  2. 21 मई 2025रक्षा मंत्रालय की वाणिज्यिक वार्ता समिति ने वाणिज्यिक बोलियाँ खोलीं; GRSE न्यूनतम बोलीदाता (L1) बना, पाँच पोतों का हकदार
  3. 2 नवंबर 2026रक्षा मंत्रालय ने आठ NGC के लिए GRSE (5) और GSL (3) से ₹53,866.50 करोड़ के अनुबंध किए

आपकी परीक्षा के लिए क्यों ज़रूरी

  • UPSCसामान्य अध्ययन III: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण, रक्षा विनिर्माण, समुद्री सुरक्षा; प्रारंभिक: NGC की संख्या, शिपयार्ड, AoN और 'नौसेना का डिज़ाइन + DPSU का प्रतिस्पर्धी निर्माण' मॉडल
  • SSCसमसामयिक सामान्य ज्ञान: ₹53,866.50 करोड़, 8 कार्वेट, GRSE 5 और GSL 3 बनाएगा
  • Bankingएक पंक्ति के तथ्य: अनुबंध मूल्य, हस्ताक्षर की तिथि (2 नवंबर 2026), दस वर्षों में लगभग 532 लाख मानव-दिवस रोज़गार
  • Railwaysकौन-क्या-कहाँ: GRSE और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम हैं; हस्ताक्षर कर्तव्य भवन-2, नई दिल्ली में
  • CDS/NDANGC की नौसैनिक भूमिकाएँ: सतह-रोधी और पनडुब्बी-रोधी युद्ध, तटीय रक्षा, तटवर्ती युद्ध, समुद्री निगरानी

मुख्य शब्द

कार्वेट
फ्रिगेट या विध्वंसक से छोटा, तेज़ युद्धपोत, जो गश्त, अनुरक्षण और पनडुब्बी-रोधी कार्य जैसे तटीय और निकट-समुद्री कामों के लिए उपयुक्त होता है।
आवश्यकता की स्वीकृति (AoN)
रक्षा अधिग्रहण परिषद की यह स्वीकृति कि कोई पूँजीगत खरीद आवश्यक है; यह रक्षा खरीद का पहला औपचारिक चरण है।
DPSU
रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम: रक्षा मंत्रालय के अधीन सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी, जैसे GRSE और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड।
L1 बोलीदाता
प्रतिस्पर्धी निविदा में वाणिज्यिक बोलियाँ खुलने पर सबसे कम बोली लगाने वाला।
मानव-दिवस
रोज़गार की एक माप: एक व्यक्ति का एक दिन का काम; 72 लाख मानव-दिवस का अर्थ कई श्रमिकों का कई दिनों तक काम हो सकता है।

क्या हुआ

2 नवंबर 2026 को रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए आठ अगली पीढ़ी के कार्वेट (Next Generation Corvettes, NGC) हेतु ₹53,866.50 करोड़ के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। ये अनुबंध दो रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSU) से हुए: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), जो पाँच कार्वेट बनाएगा, और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL), जो शेष तीन बनाएगा।

हस्ताक्षर कर्तव्य भवन-2, नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हुए। PIB की विज्ञप्ति ने इस सौदे को आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत रखा और इसे सरकार की मेक इन इंडिया नीति से जोड़ा।

पृष्ठभूमि

कार्वेट फ्रिगेट या विध्वंसक से छोटा, तेज़ युद्धपोत होता है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से तटीय और निकट-समुद्री जल में गश्त, अनुरक्षण और पनडुब्बी-रोधी कार्यों के लिए होता है।

NGC परियोजना चार वर्ष से अधिक समय से प्रक्रिया में थी:

  1. 6 जून 2022: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने लगभग ₹36,000 करोड़ की अनुमानित लागत पर NGC के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) दी। DAC ने कहा था कि ये पोत भारतीय नौसेना के नए स्वदेशी (इन-हाउस) डिज़ाइन पर बनेंगे और निगरानी, अनुरक्षण अभियान, प्रतिरोध (डिटरेंस), सतह कार्रवाई समूह (Surface Action Group) अभियान, खोज और आक्रमण तथा तटीय रक्षा जैसी भूमिकाएँ निभाएँगे।
  2. 21 मई 2025: रक्षा मंत्रालय की वाणिज्यिक वार्ता समिति की बैठक में आठ NGC की वाणिज्यिक बोलियाँ खोली गईं। स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई सूचना में GRSE ने बताया कि वह न्यूनतम बोलीदाता (L1) है और L1 बोलीदाता को पाँच पोत दिए जाएँगे।
  3. 2 नवंबर 2026: GRSE और GSL से अनुबंधों पर हस्ताक्षर।

हस्ताक्षरित अनुबंधों का मूल्य (₹53,866.50 करोड़) 2022 के AoN अनुमान (लगभग ₹36,000 करोड़) से काफ़ी अधिक है। आधिकारिक विज्ञप्तियाँ इस अंतर का कारण नहीं बतातीं, इसलिए विद्यार्थी हर आँकड़े को उसकी तिथि के साथ ही लिखें।

मुख्य विवरण

बिंदुविवरण
परियोजनाअगली पीढ़ी के कार्वेट (NGC)
पोतों की संख्या8
कुल मूल्य₹53,866.50 करोड़
GRSE5 कार्वेट
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड3 कार्वेट
हस्ताक्षर2 नवंबर 2026, कर्तव्य भवन-2, नई दिल्ली
डिज़ाइनभारतीय नौसेना (स्वदेशी)
निर्माता का चयनDPSU के बीच प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया
रोज़गार (अगले 10 वर्ष)शिपयार्डों में ~72 लाख मानव-दिवस; सहायक उद्योगों और MSME में ~460 लाख मानव-दिवस

क्षमताएँ और भूमिकाएँ: रक्षा मंत्रालय के अनुसार NGC में उन्नत मिसाइलें, हथियार और सेंसर प्रणालियाँ होंगी, जिनसे वे वायु, सतह और जल के नीचे तीनों क्षेत्रों में काम कर सकेंगे। इनकी घोषित भूमिकाएँ हैं:

  • समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा;
  • सतह-रोधी और पनडुब्बी-रोधी युद्ध;
  • तटीय रक्षा;
  • तटवर्ती युद्ध (तट के निकट लड़ाई);
  • समुद्री उपस्थिति और निगरानी अभियान।

नया क्या है: रक्षा मंत्रालय इसे ऐसी पहली परियोजना बताता है, जिसमें भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किए गए पोत उन DPSU द्वारा बनाए जाएँगे, जिनका चयन प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से हुआ है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

  • नौसैनिक क्षमता: आठ बहु-भूमिका वाले कार्वेट तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी-रोधी कार्यों के लिए पोतों की संख्या बढ़ाते हैं, जिससे बड़े पोत दूर के अभियानों के लिए मुक्त रहते हैं।
  • स्वदेशी डिज़ाइन: पोत नौसेना के अपने डिज़ाइन पर आधारित हैं, जिससे डिज़ाइन का ज्ञान और आगे के उन्नयन देश के भीतर ही रहते हैं।
  • सरकारी शिपयार्डों में प्रतिस्पर्धा: नामांकन के बजाय प्रतिस्पर्धा से निर्माता चुनने का उद्देश्य कीमत और समय पर आपूर्ति में अनुशासन लाना है।
  • औद्योगिक तंत्र: रक्षा मंत्रालय को उम्मीद है कि परियोजना में DPSU, निजी शिपयार्ड और MSME सहित भारतीय औद्योगिक साझेदार जुड़ेंगे और भारत में बनी सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकियों का उपयोग होगा।
  • रोज़गार: रक्षा मंत्रालय का अनुमान है कि अगले दस वर्षों में शिपयार्डों में लगभग 72 लाख मानव-दिवस और सहायक उद्योगों तथा MSME में 460 लाख मानव-दिवस का काम होगा, यानी कुल लगभग 532 लाख मानव-दिवस।

मुद्दे और आलोचना

  • लागत और समय-सीमा पूरी तरह सार्वजनिक नहीं: PIB विज्ञप्ति में हर शिपयार्ड का अलग अनुबंध मूल्य या आपूर्ति की समय-सारणी नहीं दी गई है, इसलिए लागत के औचित्य और प्रगति का आकलन कठिन है।
  • AoN अनुमान से वृद्धि: हस्ताक्षरित मूल्य 2022 के अनुमान से बहुत अधिक है; इसका कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया।
  • लगा समय: AoN (जून 2022) और अनुबंध (नवंबर 2026) के बीच चार वर्ष से अधिक बीत गए। स्वीकृति और अनुबंध के बीच लंबा अंतराल रक्षा खरीद की पुरानी समस्या है।
  • स्वदेशी सामग्री का प्रतिशत नहीं: विज्ञप्ति भारत में बने उपकरणों पर ज़ोर देती है, पर स्वदेशी सामग्री का प्रतिशत नहीं बताती।

आगे की राह

  • आपूर्ति के पड़ाव (माइलस्टोन) सार्वजनिक किए जाएँ और उनकी निगरानी हो, ताकि पोत समय पर बेड़े में शामिल हों।
  • हथियारों, सेंसरों और प्रणोदन प्रणाली में स्वदेशी सामग्री बढ़ाई जाए, जहाँ आयात पर निर्भरता अक्सर बनी रहती है।
  • यदि 'नौसेना का डिज़ाइन + प्रतिस्पर्धी निर्माण' मॉडल लागत और समय पर खरा उतरे, तो इसे आगे के युद्धपोत कार्यक्रमों में अपनाया जाए।
  • स्पष्ट ऑर्डर और समय पर भुगतान के माध्यम से MSME को आपूर्ति शृंखला में शुरू से जोड़ा जाए।

दोहराने के लिए हिंदी करंट अफेयर्स देखें।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

  • रक्षा मंत्रालय ने 2 नवंबर 2026 को आठ अगली पीढ़ी के कार्वेट के लिए ₹53,866.50 करोड़ के अनुबंध किए।
  • GRSE 5 NGC बनाएगा; गोवा शिपयार्ड लिमिटेड 3 बनाएगा।
  • हस्ताक्षर कर्तव्य भवन-2, नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हुए।
  • यह पहली परियोजना है जिसमें नौसेना द्वारा डिज़ाइन किए गए पोत प्रतिस्पर्धी रूप से चुने गए DPSU बनाएँगे।
  • भूमिकाएँ: व्यापार मार्गों की सुरक्षा, सतह-रोधी और पनडुब्बी-रोधी युद्ध, तटीय रक्षा, तटवर्ती युद्ध, निगरानी।
  • NGC के लिए AoN: DAC, 6 जून 2022, लगभग ₹36,000 करोड़ (अनुमान)।
  • रोज़गार: दस वर्षों में लगभग 72 लाख (शिपयार्ड) + 460 लाख (सहायक उद्योग और MSME) मानव-दिवस।

SSC, बैंकिंग और रेलवे के लिए एक पंक्ति के तथ्य

  • नवंबर 2026 में हस्ताक्षरित NGC अनुबंधों का मूल्य ₹53,866.50 करोड़ है।
  • गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) आठ में से पाँच कार्वेट बनाएगा।
  • गोवा शिपयार्ड लिमिटेड तीन कार्वेट बनाएगा।
  • NGC का डिज़ाइन भारतीय नौसेना ने स्वयं (इन-हाउस) तैयार किया है।
  • परियोजना से सहायक उद्योगों और MSME में लगभग 460 लाख मानव-दिवस का काम होने का अनुमान है।

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मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: "अगली पीढ़ी के कार्वेट (NGC) की परियोजना नौसेना के स्वदेशी डिज़ाइन को सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्डों के प्रतिस्पर्धी निर्माण से जोड़ती है।" ऐसी परियोजनाएँ भारत के रक्षा-औद्योगिक आधार को कैसे मज़बूत कर सकती हैं और उनके मार्ग में क्या बाधाएँ हैं, परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

उत्तर में शामिल करने योग्य बिंदु:

  1. परियोजना: आठ पोत, ₹53,866.50 करोड़, GRSE और GSL, नौसेना का डिज़ाइन, प्रतिस्पर्धी चयन।
  2. लाभ: नौसैनिक क्षमता, डिज़ाइन में आत्मनिर्भरता, MSME और सहायक उद्योगों की माँग, मानव-दिवस में रोज़गार।
  3. बाधाएँ: AoN से अनुबंध तक लगा समय, अनुमान से अधिक लागत, आपूर्ति और स्वदेशी सामग्री पर सीमित सार्वजनिक जानकारी।
  4. आगे की राह: पड़ावों की निगरानी, हथियारों और सेंसरों का गहरा स्वदेशीकरण, प्रतिस्पर्धी निर्माण का व्यापक उपयोग।
क्विज़ लोड हो रही है…

स्रोत

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